
माँ कालरात्रि की उपासना से पाएं असीम शक्ति। हर भय, बाधा और नकारात्मकता से मिलेगी रक्षा!
देवी दुर्गा ने असुर रक्तबीज का संहार करने के लिए इन्हें प्रकट किया था। इनका स्वरूप जितना उग्र, हृदय उतना ही करुणामय है।
घोर काले वर्ण, बिखरे केश, तीन नेत्र और विद्युत के समान चमकने वाली माला। इनकी श्वास से निकलती है अग्नि।
माँ कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है। चार भुजाओं वाली माँ भक्तों को वर और अभय मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं।
अपने उग्र रूप के बावजूद, माँ भक्तों के सभी कष्ट और भय दूर करती हैं। वे सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं।
माँ कालरात्रि के स्मरण मात्र से व्यक्ति को अदम्य साहस और आत्मबल मिलता है। हर बाधा दूर होने लगती है।
नवरात्रि के सातवें दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में स्थित होता है। इससे दिव्य अनुभूतियां मिलती हैं और पापों का नाश होता है।
माँ कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
भूत-प्रेत, राक्षस और दुष्ट शक्तियां माँ के नाम मात्र से दूर भागती हैं। अग्नि, जल, शत्रु का भय नहीं रहता।
प्रातः स्नान कर कलश पूजन के बाद माँ कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा करें। माता के समक्ष दीपक जलाएं।
माँ को रोली, अक्षत और लाल पुष्प (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें। गुड़ का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करें।
माँ कालरात्रि के मंत्र 'एकवेणी जपाकर्णपूरा...' का जाप कर अदृश्य शक्ति पाएं! यह शुभ जानकारी साझा करें!