
जंग में समुद्र में बिछाई जाती हैं नेवल माइंस। जहाजों के लिए ये होती हैं बेहद खतरनाक। जंग खत्म होने पर हटाना पड़ता है इन्हें।
माइंसवीपिंग बहुत खतरनाक और तकनीकी काम है। कुछ ही देशों की नौसेनाएं इसमें माहिर हैं। जापान उनमें से एक है।
जापान के विदेश मंत्री मोतेगी ने कहा, "सीजफायर हुआ और माइंस बाधा बनीं, तो माइंसवीपिंग पर विचार होगा।" यह अभी काल्पनिक बात है।
जापान को 90% तेल होर्मुज से मिलता है। रास्ता बंद होने पर अर्थव्यवस्था को खतरा। जापान इस मामले में बेहद सतर्क है।
जापान का संविधान शांतिप्रिय है। सेना सिर्फ देश की रक्षा के लिए है, बाहर लड़ने के लिए नहीं। यह एक बड़ी कानूनी पेचीदगी है।
2015 में कानून बना, जिससे थोड़ी छूट मिली। करीबी साझेदार पर हमला होने पर जापान सेना बाहर जा सकती है, लेकिन सीजफायर के बाद ही।
डोनाल्ड ट्रंप ने PM ताकाइची से कहा, "होर्मुज खोलने में मदद करो।" जापान ने अपने कानून की सीमाएं बताईं, दबाव में आने से मना किया।
ईरान ने संकेत दिया कि जापान के जहाजों को रास्ता मिल सकता है। दोनों देश कूटनीतिक हल निकालने की कोशिश में हैं।
जापान अमेरिका और ईरान दोनों से संबंध साध रहा है। सीजफायर के बाद माइंस हटाना, न जंग न पक्षपात - यही है उसकी चालाक रणनीति।