2026 का बड़ा कदम: मिडिल ईस्ट संकट के बीच मोदी सरकार ने संभाली तेल-गैस आपूर्ति!

मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट के मद्देनजर देश में तेल, गैस और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक की।
  • बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
  • सरकार ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को दूर करने और एलपीजी-पीएनजी वितरण को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
  • जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, साथ ही खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक आवास पर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसका मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए देश में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों से संबंधित आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना था। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा दबाव है, और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए अपनी जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

इस समीक्षा बैठक में सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इन चुनौतियों से निपटने और देश के लोगों के धैर्य व समझदारी की परीक्षा में खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध है।

मिडिल ईस्ट संकट

मिडिल ईस्ट संकट: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ रहा है। 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया था कि इस चुनौती का सामना शांति, धैर्य और जन-जागरूकता के साथ करना होगा। सरकार इस दिशा में पहले से ही सक्रिय कदम उठा रही है।

पीएम मोदी की उच्चस्तरीय बैठक और रणनीति

बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केमिकल एंड फर्टिलाइजर और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिहं पुरी और श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया जैसे प्रमुख मंत्री मौजूद रहे। इस दौरान देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और चुनौतियाँ

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ग्लोबल सप्लाई चेन में आई बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच तनाव ने हालात को और बिगाड़ दिया है। ईरान के नियंत्रण में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा आपूर्ति का मार्ग है, पर जहाजों की आवाजाही काफी सीमित हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में अधिक जानें। इस गंभीर स्थिति को संभालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं से फोन पर बातचीत भी की है।

निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयास

सरकार ने तेल, गैस, खाद की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए पहले से ही सक्रिय कदम उठाए हैं। विशेष रूप से गैस वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने और आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं।

एलपीजी और पीएनजी आपूर्ति में सुधार

सरकारी बयान के अनुसार, घरेलू एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी गैस की कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है। डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के जरिए अधिकांश डिलीवरी हो रही हैं, जिससे पैनिक बुकिंग में कमी आई है। कमर्शियल एलपीजी के मोर्चे पर भी सरकार ने आवंटन में लगातार बढ़ोतरी की है। 18 मार्च को PNG विस्तार से जुड़े सुधारों के तहत अतिरिक्त 10 प्रतिशत आवंटन किया गया, और 21 मार्च को और 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ कुल कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन और फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसे प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता दी गई है। प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो के सिलेंडर की भी व्यवस्था की गई है।

पिछले 8 दिनों में करीब 15,440 टन एलपीजी की आपूर्ति कमर्शियल उपभोक्ताओं को की गई है। साथ ही, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए PNG कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी लाएं। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) से जुड़ी सभी आवेदन प्रक्रियाओं को 10 दिनों के भीतर निपटाने का निर्देश दिया है, ताकि PNG का विस्तार तेजी से हो सके।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम

एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में लगातार छापेमारी की जा रही है। देशभर के बंदरगाहों पर संचालन सामान्य है और कहीं भी भीड़भाड़ की स्थिति नहीं है। सरकार खाड़ी और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सभी जरूरी सूचनाएं उपलब्ध करा रहे हैं। युद्ध क्षेत्र से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का कार्य भी सफलतापूर्वक किया गया है।

FAQs

मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कौन सी बैठक बुलाई थी?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर देश में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे आवश्यक क्षेत्रों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना था।

बैठक में कौन-कौन से प्रमुख मंत्री मौजूद थे?

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केमिकल एंड फर्टिलाइजर और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिहं पुरी, श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया सहित अन्य वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

सरकार ने घरेलू एलपीजी आपूर्ति को सामान्य बनाए रखा है और पैनिक बुकिंग में कमी लाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का उपयोग कर रही है। कमर्शियल एलपीजी आवंटन में भी बढ़ोतरी की गई है, और पीएनजी विस्तार को तेज करने के लिए PESO ने आवेदन प्रक्रियाओं को 10 दिनों में निपटाने के निर्देश दिए हैं।

भारतीयों की सुरक्षा के लिए सरकार क्या कर रही है?

सरकार खाड़ी और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भारतीय दूतावास नागरिकों के साथ संपर्क में हैं और युद्ध क्षेत्र से कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।

Latest Update