2026: गडकरी मानहानि विवाद, इन्फ्लुएंसर को 50 करोड़ का नोटिस!

मुख्य बिंदु

  • केंद्रीय मंत्री **नितिन गडकरी** और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों पर ‘द कारवां’ ने **बीफ कारोबार** में शामिल होने का आरोप लगाया।
  • गडकरी की कंपनी **सियान एग्रो** ने ‘द कारवां’ को 50 करोड़ रुपये का **मानहानि का नोटिस** भेजा।
  • बहुजन समाज के इन्फ्लुएंसर **मुकेश मोहन** को ‘द कारवां’ की रिपोर्ट पर वीडियो बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस और **एफआईआर** का सामना करना पड़ा।
  • मुकेश मोहन का आरोप है कि यह कार्रवाई उनके द्वारा गडकरी की **इथेनॉल** पीआर टीम का भांडाफोड़ करने का बदला है।

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री **नितिन गडकरी मानहानि विवाद** ने साल 2026 में एक नया मोड़ ले लिया है। ‘द कारवां’ पत्रिका की एक रिपोर्ट को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब इन्फ्लुएंसर **मुकेश मोहन** तक जा पहुंचा है, जिन्हें 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस और एफआईआर मिली है। यह घटनाक्रम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर तीखी बहस छिड़ गई है।

क्या है नितिन गडकरी से जुड़ा पूरा विवाद?

द कारवां की रिपोर्ट और बीफ कारोबार से संबंध

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत ‘द कारवां’ पत्रिका की एक विस्तृत रिपोर्ट से हुई। 1 मार्च 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्रीय मंत्री **नितिन गडकरी** की पारिवारिक कंपनी का संबंध एक **गोमांस एक्सपोर्टर कंपनी** से है। पत्रिका ने अपनी जांच में पाया कि मांस व्यापार करने वाली कंपनी रेंबल (जो अब वेनाड फूड है) का **सियान एग्रो एंड इंफ्रास्ट्रक्चर** से गहरा संबंध है, जिसे गडकरी की कंपनी बताया गया है।

नितिन गडकरी मानहानि विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, **सियान एग्रो** के प्रबंध निदेशक नितिन गडकरी के पुत्र निखिल गडकरी हैं। पत्रकार कौशल श्राफ की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रेंबल के अधिकांश शेयरधारकों को गडकरी परिवार के स्वामित्व वाली या उनके द्वारा समर्थित कंपनियों द्वारा फंड किया जाता है। साथ ही, गोमांस के व्यापार से जुड़ी कंपनी के पूर्व और वर्तमान शेयर धारकों ने गडकरी की कंपनी सियान एग्रो में निवेश किया है।

रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा यह भी था कि **गोमांस व्यापार** कंपनी रेंबल को एक सहकारी बैंक से बड़े लोन मिले हैं, जिसकी अध्यक्ष नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं। रेंबल के प्रबंध निदेशक महेश कुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले गडकरी की स्वामित्व वाली कंपनी सियान कैपिटल के निदेशक थे।

CIAN एग्रो का पलटवार: 50 करोड़ का मानहानि नोटिस

कारवां की रिपोर्ट सामने आने के बाद, **नितिन गडकरी** से संबंधित कंपनी CIAN एग्रो ने कड़ी आपत्ति जताई। मीडिया वेबसाइट भड़ास फॉर मीडिया के अनुसार, CIAN एग्रो ने ‘द कारवां’ को लगभग **50 करोड़ रुपये** के हर्जाने का कानूनी **मानहानि का नोटिस** भेजा। कंपनी का कहना है कि रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोप झूठे, भ्रामक और निराधार हैं, और इनसे कंपनी की प्रतिष्ठा व कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा है।

कंपनी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि CIAN एग्रो का बीफ या किसी भी गोमांस से जुड़े कारोबार से कोई संबंध नहीं है। उनके पास इस तरह के किसी व्यापार, प्रोसेसिंग या निर्यात का लाइसेंस या व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। कंपनी का मुख्य कारोबार सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़ा है। कंपनी ने पत्रिका से रिपोर्ट वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है, साथ ही भविष्य में दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी जताई है।

मुकेश मोहन विवाद: कारवां रिपोर्ट और इथेनॉल कनेक्शन

इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को मिला 50 करोड़ का नोटिस और FIR

अभी गडकरी और कारवां का विवाद थमा भी नहीं था कि बहुजन समाज के इन्फ्लुएंसर **मुकेश मोहन** ने इसी रिपोर्ट के आधार पर एक वीडियो बनाया। इसके तुरंत बाद, उन्हें भी 50 करोड़ रुपये का **मानहानि का नोटिस** भेजकर नागपुर में एक **एफआईआर** दर्ज करा ली गई। मुकेश मोहन ने खुद 26 मार्च को अपने एक्स पोस्ट पर इस बात की जानकारी दी, जिससे यह मामला और गरमा गया।

आप उनके एक्स पोस्ट को यहां देख सकते हैं: Mukesh Mohan का एक्स पोस्ट

इथेनॉल विवाद: पीआर टीम का भांडाफोड़ और पुराना हिसाब

**मुकेश मोहन** ने 50 करोड़ की मानहानि नोटिस के पीछे की कहानी बताई है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई **इथेनॉल** के मुद्दे पर गडकरी की पीआर टीम के भांडाफोड़ के कारण हुई है। मुकेश के अनुसार, पिछले साल गडकरी की पीआर टीम ने उन्हें इथेनॉल के फायदे गिनाने के लिए पेड वीडियो बनाने का प्रस्ताव दिया था।

मुकेश ने पेड वीडियो बनाने के बजाय, लोगों को यह बता दिया कि गडकरी जी इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर इथेनॉल का प्रचार करवा रहे हैं, और उन्हें भी ऐसा ही प्रस्ताव मिला था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर 2.5-3 करोड़ लोगों ने देखा था और विपक्ष के नेताओं ने भी इसे साझा किया था। मुकेश का कहना है कि उस वीडियो के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती थी, इसलिए उन्हें यह नया मौका मिला जब उन्होंने **द कारवां की रिपोर्ट** को कोट करते हुए **नितिन गडकरी** के परिवार के **बीफ कारोबार** से संबंधित होने पर वीडियो बनाया।

सोशल मीडिया पर गरमाया माहौल: आगे क्या?

इस पूरे मामले में, अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर **मुकेश मोहन** के खिलाफ हुई मानहानि की कार्रवाई से यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा है। हर कोई इस मुद्दे को लेकर अपने तर्क और विचार रख रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब **नितिन गडकरी** और उनकी कंपनी CIAN एग्रो ने ‘द कारवां’ को मानहानि का नोटिस भेजा है और उसने अपनी रिपोर्ट को गलत नहीं माना है, और किसी अदालत ने भी उस रिपोर्ट में किसी तरह की त्रुटि नहीं पाई है, तो फिर इस पर वीडियो बनाने पर कार्रवाई क्यों? इस पूरे **नितिन गडकरी मानहानि विवाद** का भविष्य क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

FAQ: नितिन गडकरी मानहानि विवाद पर आपके सवाल

Q1: नितिन गडकरी मानहानि विवाद क्या है?

A1: यह विवाद ‘द कारवां’ पत्रिका की एक रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के परिवार से जुड़ी कंपनियों पर बीफ कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसके बाद, गडकरी की कंपनी ने कारवां को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा, और इसी रिपोर्ट पर वीडियो बनाने वाले इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को भी 50 करोड़ का नोटिस और एफआईआर मिली।

Q2: मुकेश मोहन को नोटिस क्यों मिला है?

A2: मुकेश मोहन को ‘द कारवां’ की उस रिपोर्ट के आधार पर एक वीडियो बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस और नागपुर में एफआईआर मिली है, जिसमें नितिन गडकरी के परिवार को बीफ कारोबार से जोड़ा गया था। मुकेश मोहन का आरोप है कि यह उनके द्वारा गडकरी की इथेनॉल पीआर टीम के खुलासे का बदला है।

Q3: CIAN एग्रो ने ‘द कारवां’ की रिपोर्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

A3: CIAN एग्रो ने ‘द कारवां’ की रिपोर्ट को झूठा, भ्रामक और निराधार बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। कंपनी ने पत्रिका को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है और दावा किया है कि उसका बीफ या किसी भी गोमांस से जुड़े कारोबार से कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने रिपोर्ट वापस लेने और सार्वजनिक माफी की मांग की है।

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