5 सनसनीखेज खुलासे: अहमदाबाद नकली नोट रैकेट का पर्दाफाश 2026!

गुजरात के अहमदाबाद शहर में एक ऐसे सनसनीखेज नकली नोट रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सिर्फ नकली करेंसी छापने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक कथित गुरु और उसके आश्रम का नाम भी सामने आया है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस रैकेट का भंडाफोड़ किया और कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी बरामद की है। इस पूरे प्रकरण में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो आपको हैरान कर देंगे।

पुलिस के अनुसार, इस नकली करेंसी रैकेट का मास्टरमाइंड प्रदीप जोटांगिया है, जो सूरत के सत्यम योगाश्रम से जुड़ा हुआ है। आश्रम के विस्तार की महत्वाकांक्षा और आर्थिक तंगी ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध का रास्ता कभी भी सही मंजिल तक नहीं पहुंचाता। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।

अहमदाबाद नकली नोट

मुख्य बिंदु:

  • अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी के साथ 7 आरोपियों को किया गिरफ्तार।
  • सूरत के सत्यम योगाश्रम से जुड़े प्रदीप जोटांगिया को नकली नोट रैकेट का मास्टरमाइंड बताया गया।
  • नकली नोट छापने के लिए चीन से विशेष कागज मंगवाए गए थे, जो असली नोटों जैसे दिखते थे।
  • गिरफ्तार आरोपियों ने पहली बड़ी डील से पहले ही करीब 28 लाख रुपये की नकली करेंसी बाजार में खपा दी थी।

कैसे हुआ अहमदाबाद नकली नोट रैकेट का पर्दाफाश 2026?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को एक गुप्त सूचना मिली कि नकली करेंसी की एक बड़ी खेप का सौदा होने वाला है। पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े अपराध को अंजाम देने से पहले ही रोक दिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने जाल बिछाया और सटीक जानकारी के आधार पर आरोपियों को मौके से रंगे हाथों दबोच लिया।

आश्रम के विस्तार का सपना और आर्थिक तंगी

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रदीप जोटांगिया सूरत स्थित अपने आश्रम को बड़ा बनाना चाहता था। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए उसे भारी मात्रा में धन की आवश्यकता थी। पिछले करीब एक साल से वह विभिन्न माध्यमों से आश्रम के लिए फंड जुटाने का प्रयास कर रहा था। उसने सेवा कार्यों से संबंधित पैम्फलेट भी छपवाए और लोगों से चंदा मांगने के लिए विज्ञापन भी दिए। आश्रम के बाहर योग सिखाने का बोर्ड भी लगा था। लेकिन, इन सभी प्रयासों के बावजूद, अपेक्षित धनराशि इकट्ठा नहीं हो सकी, जिससे प्रदीप आर्थिक तंगी से जूझने लगा।

चीन से मंगवाए गए खास कागज और प्रिंटिंग का जाल

जब वैध तरीकों से पैसे नहीं जुटे, तो प्रदीप जोटांगिया और उसके अनुयायियों ने मिलकर एक आपराधिक योजना बनाई – नकली नोट छापने की। इस योजना को अंजाम देने के लिए मुकुल उर्फ मुकेश नाम का एक आरोपी नकली नोटों की छपाई के काम में लग गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस काम के लिए चीन से विशेष प्रकार के कागज मंगवाए गए थे। ये कागज हूबहू असली नोटों जैसे दिखाई देते थे, जिससे आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता था। इन्हीं कागजों पर प्रिंटिंग कर उच्च गुणवत्ता की नकली करेंसी तैयार की जा रही थी। यह दर्शाता है कि यह एक सुनियोजित और बड़े पैमाने का रैकेट था।

डील का तरीका और बाजार में नकली नोटों का प्रवाह

पुलिस के अनुसार, इन नकली नोटों को बाजार में खपाने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया गया था। अहमदाबाद के एक व्यक्ति के साथ 33 प्रतिशत की दर से इन नोटों को बेचने की डील तय हुई थी। इसका मतलब यह है कि 3 लाख रुपये की नकली करेंसी के बदले 1 लाख रुपये असली नोट लिए जाने थे। यह उनकी पहली बड़ी डील थी, जिसका अनुमानित मूल्य 2 करोड़ रुपये से अधिक था। हालांकि, यह खुलासा भी हुआ है कि इस बड़ी डील से पहले, आरोपी पहले ही करीब 28 लाख रुपये की नकली करेंसी बाजार में खपा चुके थे। यह आंकड़ा बताता है कि यह रैकेट कब से सक्रिय था और कितनी बड़ी मात्रा में नकली नोटों को अर्थव्यवस्था में प्रवाहित कर चुका था।

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सूरत से अहमदाबाद तक का सफर और क्राइम ब्रांच का शिकंजा

बताया जा रहा है कि 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी का सौदा करने के लिए आरोपी सूरत से अहमदाबाद पहुंचे थे। वे इस बड़ी डील को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते, क्राइम ब्रांच को इसकी भनक लग गई। सूचना मिलते ही, क्राइम ब्रांच की टीम ने तुरंत कार्रवाई की और बताए गए स्थान पर छापा मारकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपी प्रदीप जोटांगिया के अनुयायी बताए जा रहे हैं, जो उसके निर्देशों पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। नकली नोटों के इस अवैध कारोबार को लेकर कई गोपनीय बैठकें आश्रम और मुकेश के घर पर आयोजित की गई थीं।

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आगे की जांच और फरार आरोपियों की तलाश

फिलहाल, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया है और उनसे पूछताछ के लिए 14 दिन के रिमांड की मांग की है। पुलिस का मानना है कि इस पूछताछ के दौरान इस रैकेट से जुड़े और भी महत्वपूर्ण नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, पुलिस इस मामले से जुड़े दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है। इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है और जांच को तेज कर दिया गया है। इस पूरे मामले की परतें खुलने के बाद ही असली सच्चाई सामने आ पाएगी कि यह नकली करेंसी रैकेट कितना गहरा और व्यापक था।

जागरूकता फैलाना भी इस प्रकार के अपराधों को रोकने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। नकली नोटों की पहचान कैसे करें, इस पर अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट RBI.org.in पर जा सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: अहमदाबाद में किस नकली करेंसी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है?
A1: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक बड़े नकली करेंसी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें सूरत के सत्यम योगाश्रम से जुड़े कथित गुरु प्रदीप जोटांगिया समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकली करेंसी बरामद हुई है।

Q2: प्रदीप जोटांगिया कौन है और वह नकली नोट क्यों छाप रहा था?
A2: प्रदीप जोटांगिया सूरत के सत्यम योगाश्रम से जुड़ा एक कथित गुरु है। वह अपने आश्रम का विस्तार करना चाहता था, जिसके लिए उसे बड़ी रकम की जरूरत थी। वैध तरीकों से पैसे न मिलने पर उसने नकली नोट छापने की योजना बनाई।

Q3: नकली नोट छापने के लिए कागज कहाँ से मंगाए जाते थे?
A3: पुलिस जांच में सामने आया है कि नकली नोट छापने के लिए चीन से विशेष प्रकार के कागज मंगवाए गए थे, जो असली नोटों जैसे दिखाई देते थे। इन्हीं कागजों पर प्रिंटिंग कर नकली करेंसी तैयार की जाती थी।

Q4: इस रैकेट में कुल कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और पुलिस आगे क्या कर रही है?
A4: इस रैकेट में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को 14 दिन के रिमांड पर लिया है और पूछताछ कर रही है। साथ ही, इस मामले से जुड़े दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है।

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