मुख्य बिंदु
- शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार बढ़त दर्ज की गई, सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे।
- रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर 93.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
- पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, जिससे बाजार को राहत मिली।
- HDFC बैंक के शेयरों पर दबाव रहा, जबकि टाटा स्टील, SBI और L&T जैसे शेयरों में तेजी आई।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आया बड़ा उछाल: जानें पूरा हाल
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर निवेशकों को चौंकाते हुए जबरदस्त बढ़त दर्ज की। सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 976.77 अंक बढ़कर 75,184.01 पर पहुंच गया, जो एक नया रिकॉर्ड स्तर है। इसी तरह, निफ्टी भी 301.7 अंक उछलकर 23,303.85 के ऐतिहासिक स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह तेजी निवेशकों के आत्मविश्वास को दर्शाती है, विशेषकर गुरुवार की भारी गिरावट के बाद, जो 2026 तक की बाजार संभावनाओं को भी प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, इस शानदार प्रदर्शन के बीच रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे कमजोर होकर अपने रिकॉर्ड अंतर्देशीय निचले स्तर 93.08 पर आ गया। यह गिरावट निर्यातकों और आयातकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वी.के. विजयकुमार ने भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विजयकुमार ने बताया कि निफ्टी ने पहले तीन दिनों में जो बढ़त हासिल की थी, वह गुरुवार को 775 अंकों की भारी गिरावट के साथ पूरी तरह खत्म हो गई थी। उनके अनुसार, बाजार में यह “आशा और डर का चक्र” आने वाले समय में भी जारी रह सकता है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बाजार को मिली राहत: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद
बाजार में आई इस तेजी के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद है। इस्राइल के प्रधानमंत्री के हालिया बयान के बाद यह संकेत मिला है कि ईरान के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर आगे कोई हमला नहीं होगा। इस खबर से निवेशकों को कुछ राहत मिली है और इसका सीधा असर ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर पड़ा है। कच्चा तेल अपने हालिया उच्च स्तर 118 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 106 डॉलर तक आ गया है। रिपोर्ट लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 106.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह तेल कीमतों में स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जैसा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर देखा जा सकता है।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल: किसने किया बेहतर प्रदर्शन?
शुक्रवार को सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से कई कंपनियों ने शानदार लाभ दर्ज किया। टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टेक महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, पावर ग्रिड और एनटीपीसी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। इन कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
HDFC बैंक के शेयरों पर दबाव क्यों?
जहां कुछ कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं, वहीं निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक एचडीएफसी बैंक के शेयरों पर दबाव बना रहा। बैंक के पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद शेयर में कमजोरी देखी गई। शुरुआती कारोबार में एचडीएफसी बैंक का शेयर 0.85 फीसदी गिरकर 791 रुपये पर आ गया। यह घटनाक्रम निवेशकों के बीच कुछ चिंता का कारण बना।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुझान
शुक्रवार के शुरुआती सत्र में एशियाई बाजारों में मिश्रित रुझान देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 53372 के स्तर पर आ गया, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 0.26 प्रतिशत गिरकर 4954 के स्तर पर और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.56 प्रतिशत गिरकर 25358 के स्तर पर आ गया।
वहीं, ताइवान का भारित सूचकांक 0.21 प्रतिशत बढ़कर 33759 के स्तर पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 0.55 प्रतिशत बढ़कर 5795 के स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल और विदेशी निवेश का हाल
वैश्विक कच्चे तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 1.63 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 106.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 7,558.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो बाजार की गिरावट का एक प्रमुख कारण था। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,863.96 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।
गुरुवार को बाजार की बड़ी गिरावट: एक तुलना
यह जानना महत्वपूर्ण है कि शुक्रवार की यह तेजी गुरुवार की भारी गिरावट के बाद आई है। गुरुवार को सेंसेक्स 2,496.89 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ था। जून 2024 के बाद यह एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट थी। वहीं, निफ्टी 775.65 अंक या 3.26 प्रतिशत गिरकर 23,002.15 पर समाप्त हुआ था। यह उतार-चढ़ाव भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा अस्थिरता को दर्शाता है, जहाँ निवेशक आशा और डर के बीच झूल रहे हैं, और भविष्य के लिए अपनी रणनीतियों को 2026 तक ध्यान में रखकर बना रहे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार कैसा रहा?
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंकों की बढ़त पर खुले?
सेंसेक्स 976.77 अंक बढ़कर 75,184.01 पर और निफ्टी 301.7 अंक बढ़कर 23,303.85 पर खुला।
रुपये की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले क्या स्थिति रही?
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर अपने रिकॉर्ड अंतर्देशीय निचले स्तर 93.08 पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव का क्या कारण है?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वी.के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार में पिछले चार दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जो “आशा और डर के चक्र” का परिणाम है।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार पर क्या असर पड़ा?
तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों को राहत मिली और ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, जिससे बाजार को सकारात्मक संकेत मिला।
HDFC बैंक के शेयरों में गिरावट क्यों आई?
HDFC बैंक के पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों पर दबाव बना रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कितनी गिरावट दर्ज की गई थी?
गुरुवार को सेंसेक्स 2,496.89 अंक (3.26%) गिरकर 74,207.24 पर और निफ्टी 775.65 अंक (3.26%) गिरकर 23,002.15 पर बंद हुआ था, जो जून 2024 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी।